सुबोध उनियाल और हरीश रावत में छिड़ी जुबानी जंग
हरीश रावत:मेरे लिए गलत सोचने वाले दुनिया छोड़ कर चले गए

देहरादून,
उत्तराखंड की राजनीति में अक्सर अपने राजनीतिक बयानों से दूसरे नेताओं को असहज करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत इस बार स्थायी राजधानी के बयान पर कई नेताओं के निशाने पर आ गए हैं और निशाना भी ऐसा की एक वक्त में हरदा के करीबी रहे मंत्री सुबोध उनियाल ने उनकी उम्र और मानसिक संतुलन पर टिप्पणी कर डाली है। इसके बाद दोनों ही नेताओं में जुबानी जंग छिड़ गई है ।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का एक बयान सामने आया जिसने उन्होंने कहा की विजय बहुगुणा और उनके साथी अगर उनकी सरकार ना गिराते तो गैरसैण अब तक राज्य की पूर्णकालिक राजधानी घोषित हो चुकी होती। इसके बाद कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने उन्हें उनकी उम्र का तगाजा देते हुए कहा कि हरीश रावत का मानसिक संतुलन ठीक नहीं है जिसके बाद हरीश रावत और कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है और यह जंग थमने का नाम नहीं ले रही है।
हरीश रावत के इस बयान के बाद कभी उनके करीबी रहे और वर्तमान में भाजपा कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने गंभीर कटाक्ष किया है । उन्होंने कहा है की हरीश रावत को अब राजनीति से संन्यास लेकर वानप्रस्थ की ओर चला जाना चाहिए ।उन्होंने कहा की उम्र के लिहाज से उनके दिमाग पर भी अब असर होने लगा है , और वह अब उल्लू जुनून बातें करने लगे है ।उनियाल ने कहा की आज उत्तराखंड में हरीश रावत एक चलती फिरती झूठ की मशीन मात्र बनकर रह गए । उनियाल ने कहा कि हमारे कांग्रेस छोड़ने के एक साल बाद तक भी हरीश रावत प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे तब उन्होंने गैरसेंड स्थाई राजधानी क्यों नहीं बनाई ।
वहीं मंत्री सुबोध उनियाल द्वारा हरदा की उम्र और मानसिक संतुलन को लेकर की गई टिपडी पर भी उन्होंने चुटकी ली । हरदा ने कहा की इससे पहले भी कई लोग इस तरीके की आकांक्षा पाल चुके हैं जिनमे से कुछ तो भाजपा में चल गए दूसरी ओर ऐसी आकांक्षा पालने वाले कुछ उपर भी चले गए ।
वही कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने हरीश रावत पर तीखा पलटवार करते हुए कहा की उम्र के हिसाब से पहले ऊपर जाने का समय हरीश रावत का है। बाकी भगवान के ऊपर है।
गैरसैंण का मुद्दा प्रदेश में राजनीति का केंद्र बना रहता है लेकिन इस बार गैरसैंण राजनीतिक दलों के नेताओं ने इसे हास्य पर खड़ा कर दिया है। गैरसैंण में सत्र के बाद से प्रदेश की सियासत में जुबानी जंग छिड़ी हुई है और जवानी जंग भी ऐसी जिसमें की शब्दों की मर्यादा का ख्याल भी नहीं रखा जा रहा है। ऐसे में यह जुबानी जंग आगे कहां जाकर रुकती है यह देखने वाली बात होगी।



