नहीं रहे हास्य कलाकार घनानंद उर्फ घन्ना भाई

देहरादून,
पिछले पांच दिन से वेंटिलेटर पर चल रहे उत्तराखंड के प्रसिद्ध हास्य कलाकार घनानंद उर्फ घन्ना भाई का निधन हो गया। इस दौरान महंत इंद्रेश अस्पताल में भर्ती हास्य कलाकार घनानन्द के निधन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत विभिन्न सांस्कृतिक,राजनीतिक व सामाजिक संगठनों ने दःुख जताया।
यहां उत्तराखंड के प्रसिद्ध हास्य कलाकार घनानंद नहीं रहे। अपनी विशिष्ट हास्य शैली से दर्शकों को लोटपोट करने वाले घना भाई रुलाकर इस दुनिया को अलविदा कह गए। वह महंत इंद्रेश अस्पताल में भर्ती थे। गंभीर बीमारी से जूझ रहे घनानंद को बचाने के लिए डॉक्टरों ने अथक प्रयास किए। लेकिन दोपहर को उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा, जिससे उन्हें उबारा नहीं जा सका। वह करीब 72 वर्ष के थे।
इस दौरान महंत इन्द्रेश अस्पताल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी भूपेंद्र रतूड़ी ने उनकी मौत की पुष्टि की है। इससे पूर्व हास्य कलाकार घनानंद को महंत इंद्रेश अस्पताल में गहन चिकित्सा के बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। चिकित्सक उनका जीवन बचाने की पूरी कोशिश कर रहे थे, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था और उनका पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार कल उनके पैतृक गांव में किया जाएगा। घनानंद की मृत्य से कला जगत में शोक की लहर है और इस दौरान उनके लाखों प्रशंसक व्यथित हैं।
वहीं उत्तराखंड की लोक संस्कृति और हास्य अदाकारी में घनानंद का नाम बेहद आदर से लिया जाता था। इस दौरान सोशल मीडिया पर अब उनके प्रशंसकों ने अपने प्रिय कलाकार को श्रद्धांजलि अर्पित करनी शुरू कर दी है। हास्य कलाकार घनानंद की आकस्मिक मृत्यु पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित विभिन्न सांस्कृतिक, राजनैतिक और सामाजिक संगठनों ने शोक व्यक्त किया है। इस दौरान सभी ने इसे कला संस्कृति और रंगमंच के लिए अपूर्णीय क्षति बताया है।
इस दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध हास्य कलाकार घनानंद घन्ना भाई के निधन का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि ईश्वर, दिवंगत आत्मा को श्रीचरणों में स्थान एवं शोक संतप्त परिजनों व समर्थकों को यह असीम कष्ट सहने की शक्ति प्रदान करें।
उन्होंने कहा कि आपकी सरलता, मृदुता और अद्वितीय अभिनय शैली ने लोगों को न केवल हंसाया, बल्कि जीवन के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को एक अलग दृष्टिकोण से देखने का नजरिया दिया। उत्तराखण्ड के फिल्म जगत और अभिनय के क्षेत्र में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। उन्होंने कहा कि आप सदैव हमारे दिलों में जीवित रहेंगे। उन्होंने राजनीति में भी हाथ आजमाया था। भाजपा के टिकट पर 2012 में उन्होंने पौड़ी से विधानसभा चुनाव भी लड़ा था। इस दौरान हालांकि घन्ना भाई चुनाव हार गए थे और आज वह संसार से हमेशा के लिए विदा हो गये और अब उनकी यादें ही शेष रह गई।



