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उत्तराखंड में फिर फेल हुए 14 दवाइयों के सैंपल, लाइसेंस निलंबित करने के निर्देश

उत्तराखंड में एक बार फिर दवाइयों के सैंपल फेल हुए हैं। प्रदेश में बनीं 14 दवाइयां गुणवत्ता जांच में फेल पाई गई है । केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) और उत्तराखंड ड्रग विभाग की संयुक्त सेंपलिंग के बाद रिपोर्ट सामने आई है। इसके बाद केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन ने उत्तराखंड ड्रग विभाग को अलर्ट करते हुए अभियान तेज करने के निर्देश दिए हैं।

उत्तराखंड में एक बड़ा बाजार फार्मा कंपनियों का है, लगभग 400 से अधिक ऐसी कंपनी हैं, जो दवाइयां या अन्य सामग्री बना रही है, जिनमें कंपनियों द्वारा बनाई जा रही 14 दवाइयां मानकों के विपरीत पाई गई है। यह दवाएं अलग-अलग इलाज के लिए बाजारों में उतारी गई थी, चिंता की बात यह है कि केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन यानी सीडीएसओ की ओर से कहा है कि ये दवाइयां उत्तराखंड के बाजारों में जहां-जहां भी भेजी गई है, उन्हें तत्काल वापस मंगवाया जाए। इसके साथ ही देहरादून और हरिद्वार में बनने वाली दवाइयों की तमाम कंपनियों को नोटिस जारी करने को कहा गया है। जिन दवाइयां को गुणवत्ता के विपरीत पाया गया है, उसमें बुखार शुगर, कमजोरी, मानसिक बीमारी और कई तरह की इलाज की दवा शामिल हैं। समय-समय पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा अभियान चलाया जाता है, जिसमें दवाइयों की गुणवत्ता को लेकर सैंपलिंग होती है। जिन दवाइयां के सैंपल फेल हुए हैं उनके सैंपल मई के महीने में लिए गए थे। वही अपर आयुक्त, औषधि नियंत्रक ताजवर सिंह का कहना है की जिन-जिन कंपनियों की लापरवाही की रिपोर्ट मिली है, उन कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए लाइसेंस निलंबित करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही तमाम मेडिकल स्टोरों पर दवाओं की बिक्री को रोका गया है। सभी कंपनियों को यह निर्देशित किया गया है कि गुणवत्ता में कोताही बरतने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। देहरादून और हरिद्वार में जिन कंपनियों में दवाइयां बन रही हैं, उन कंपनियों में विभाग लगातार निरीक्षण करता है। हरिद्वार में ही बीते 3 महीने में 25 से ज्यादा बार कंपनियों का निरीक्षण किया गया और अब तक ड्रग विभाग की कार्रवाई में ड्रग माफियाओं के खिलाफ लगभग 50 मुकदमे भी दर्ज किए गए हैं।

हरिद्वार ड्रग इंस्पेक्टर अनीता भारती का कहना है कि जिन कंपनियों के सैंपल फेल पाए गए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और लगातार फार्मा कंपनियों का निरीक्षण भी किया जा रहा है। इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि फैक्ट्री में बनने वाली दावाइयों में किसी भी तरह की अनियमित ना बरती जाए।

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